चेन्नई | तमिलनाडु से राज्यसभा की एक खाली सीट पर होने वाले आगामी उपचुनाव ने राज्य के सियासी पारे को बढ़ा दिया है। 18 जून को होने जा रहे इस चुनाव को प्रदेश की सत्तारूढ़ टीवीके (TVK) सरकार की पहली बड़ी अग्निपरीक्षा के रूप में देखा जा रहा है। हालिया विधानसभा चुनाव में अभिनेता से नेता बने विजय के नेतृत्व में टीवीके की जीत के बाद यह पहला राज्यसभा चुनाव है। दरअसल, यह सीट सीवी शनमुगम के इस्तीफे की वजह से रिक्त हुई है, जिन्होंने मेलम विधानसभा क्षेत्र से जीत हासिल करने के बाद संसद के उच्च सदन की सदस्यता से त्यागपत्र दे दिया था।

उम्मीदवार चयन और गठबंधन को साधने की चुनौती

इस उपचुनाव के एलान के बाद से ही सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर प्रत्याशी के नाम को लेकर मंथन का दौर शुरू हो गया है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की सबसे ज्यादा चर्चा है कि टीवीके इस सीट पर अपना खुद का उम्मीदवार खड़ा करेगी या फिर अपने सहयोगियों को खुश रखने के लिए किसी साथी दल को यह मौका देगी। इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस की भूमिका पर भी सबकी नजरें टिकी हुई हैं, जिसने राज्य में टीवीके की सरकार बनवाने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

चुनावी कार्यक्रम और नामांकन की तारीखें

चुनाव आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के मुताबिक, इस उपचुनाव के लिए आधिकारिक अधिसूचना 1 जून को जारी की जाएगी और इसी के साथ नामांकन की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी। प्रत्याशी 8 जून तक अपने पर्चे दाखिल कर सकेंगे, जिनकी जांच 9 जून को की जाएगी। नाम वापस लेने की आखिरी तारीख 11 जून तय की गई है। यदि आवश्यक हुआ, तो 18 जून को सुबह से दोपहर तक मतदान होगा और उसी दिन शाम तक नतीजों की घोषणा भी कर दी जाएगी।

विधानसभा का गणित और जीत का समीकरण

वर्तमान में तमिलनाडु विधानसभा की प्रभावी सदस्य संख्या 233 है, जिसके अनुसार राज्यसभा की इस सीट पर फतह हासिल करने के लिए किसी भी उम्मीदवार को कम से कम 117 विधायकों के वोटों की आवश्यकता होगी। चूंकि सूबे में किसी भी एक राजनीतिक दल के पास अकेले दम पर पूर्ण बहुमत नहीं है, इसलिए इस चुनाव का पूरा दारोमदार पूरी तरह से गठबंधन के जोड़-तोड़ और चुनावी अंकगणित पर टिक गया है। हालांकि, मौजूदा आंकड़ों को देखते हुए टीवीके के नेतृत्व वाले सत्ताधारी गठबंधन का पलड़ा भारी नजर आ रहा है।