दशहरे पर इस प्रकार करें शस्त्र पूजन
अश्विन माह के शुक्ल पक्ष में दशमी तिथि को दशहरा मनाया जाता है। दशहरे पर शस्त्र पूजन भी किया जाता है। रावण पर भगवान राम की जीत को याद करते हुए, शस्त्रों की पूजा की जाती है। यह अनुष्ठान युद्ध और संघर्ष में विजय प्राप्त करने के लिए भगवान से आशीर्वाद प्राप्त करने का एक तरीका है।
शस्त्र पूजन के लिए, सुबह स्नान ध्यान आदि करके शस्त्रों की गंगाजल से सफाई कर लें और पूजा मुहूर्त में साफ वस्त्र बिछाकर सभी शस्त्रों को उसपर रख लें। उनके ऊपर दशहरा पूजा सामिग्री अक्षत, पुष्प, रोली, अक्षत, चंदन इत्यादि छिड़क कर धूप दीप से विधि विधान से पूजन करें।
दशहरे का पूजन दोपहर के समय किया जाता है। अपने पूजा स्थल में भगवान राम की प्रतिमा के साथ ही साथ मां दुर्गा की प्रतिमा को भी स्थापित करें।
उनके मंत्रों के साथ साथ विजय (अपराजिता ) का मंत्र भी लेना चाहिए। इससे स्वयं के भी विजय भाव में वृद्धि होती है।
कैसे हुई शुरुआत
दशहरे पर शस्त्र पूजन की शुरुआत के विषय में विद्वानों के बीच अलग-अलग मत हैं, लेकिन यह माना जाता है कि यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। यह पूजा विशेष रूप से योद्धाओं के बीच लोकप्रिय रही है, जो युद्ध में जाने से पहले अपने शस्त्रों का पूजन करते थे।
महत्व
शस्त्र पूजन करने से कई आध्यात्मिक और मानसिक लाभ होते हैं। यह अनुष्ठान हमें सुरक्षा और शक्ति प्रदान करता है, साथ ही जीवन में आने वाले कठिन संघर्षों में विजय प्राप्त करने की शक्ति भी मिलती है। शस्त्र पूजन से आत्मविश्वास बढ़ता है, परिवार की सुरक्षा और समृद्धि सुनिश्चित होती है, और हमारे भीतर साहस और संकल्प शक्ति का विकास होता है. यह पूजा हमारी आंतरिक और बाहरी सुरक्षा का प्रतीक है, जिससे हम हर संकट का सामना कर सकते हैं.

बंगाल में चुनावी माहौल गर्म, शुभेंदु अधिकारी ने टीएमसी को घेरा
लखनऊ कचहरी पर चला बुलडोजर: हाईकोर्ट के आदेश पर 100 से अधिक वकील चैंबर ध्वस्त
हीटवेव से निपटने के लिए 20 शहरों में विशेष रणनीति, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट
लंबे समय के सहयोगी देशों में बढ़ी अनबन, अमेरिका-इजरायल रिश्ते चर्चा में
ओवैसी को लेकर गिरिराज का विवादित बयान, राजनीतिक हलकों में हलचल