अफ्रीकन स्वाइन फीवर से मिलेगी राहत, भोपाल के वैज्ञानिकों की स्वदेशी वैक्सीन तैयार
भोपाल। भारत ने पशु चिकित्सा और अनुसंधान के क्षेत्र में एक बार फिर वैश्विक पटल पर अपनी वैज्ञानिक क्षमता का लोहा मनवाया है। देश के वैज्ञानिकों ने सुअरों के लिए जानलेवा साबित होने वाली बीमारी 'अफ्रीकन स्वाइन फीवर' (एएसएफ) से बचाव की पहली स्वदेशी वैक्सीन सफलतापूर्वक विकसित कर ली है। यह ऐतिहासिक और क्रांतिकारी सफलता भोपाल स्थित ‘राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशुरोग संस्थान’ (आईसीएआर-नीशाद) के वैज्ञानिकों की वर्षों की कड़ी मेहनत का परिणाम है। इस महत्वपूर्ण स्वदेशी टीके को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के 98वें स्थापना दिवस के पावन अवसर पर देश के पशुपालकों और किसानों के हित में राष्ट्र को समर्पित कर दिया गया है।
देश की राजधानी में हुआ भव्य लॉन्चिंग समारोह
इस स्वदेशी और अभूतपूर्व वैक्सीन की औपचारिक लॉन्चिंग देश की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित एक गरिमामयी समारोह के दौरान की गई। नई दिल्ली के एनएएससी परिसर में आयोजित आईसीएआर के 98वें स्थापना दिवस समारोह के मुख्य अतिथि और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस जीवन रक्षक टीके को राष्ट्र को समर्पित किया। इस ऐतिहासिक अवसर पर केंद्रीय पशुपालन मंत्री राजीव रंजन सिंह, विभिन्न मंत्रालयों के राज्य मंत्री, आईसीएआर के महानिदेशक एमएल जाट और देश के शीर्ष कृषि व पशु चिकित्सा वैज्ञानिक विशेष रूप से उपस्थित रहे, जिन्होंने इस उपलब्धि को भारतीय विज्ञान के इतिहास में एक नया मील का पत्थर बताया।
सौ फीसदी मृत्यु दर वाली महामारी का स्वदेशी समाधान
अफ्रीकन स्वाइन फीवर सुअरों में फैलने वाला एक अत्यंत संक्रामक और घातक वायरल रोग है, जिसमें ग्रसित पशुओं की मृत्यु दर लगभग शत-प्रतिशत होती है। भारत में इस विनाशकारी बीमारी का पहला मामला साल 2020 में दर्ज किया गया था, जिसके बाद यह तेजी से देश के कई राज्यों में फैल गई और बड़े पैमाने पर पशुधन को नुकसान पहुंचाया। इस स्वदेशी वैक्सीन के निर्माण से पहले पूरे देश में इस जानलेवा बीमारी से बचाव या उपचार के लिए कोई भी टीका या प्रभावी दवा उपलब्ध नहीं थी, जिसके कारण पशुपालकों को हर साल करोड़ों रुपये का नुकसान झेलना पड़ रहा था।
पशुओं को मारने की मजबूरी से मिलेगी अब मुक्ति
इस बेहद संक्रामक बीमारी की रोकथाम के लिए अब तक देश में कोई प्रभावी चिकित्सा उपलब्ध न होने के कारण ग्रसित सुअरों को मारना ही एकमात्र विकल्प बचा था। इसके साथ ही संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए बेहद कड़े और खर्चीले जैव-सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करना पड़ता था। अपनी आंखों के सामने अपने स्वस्थ पशुओं को मारते देखना किसानों और पशुपालकों के लिए न केवल मानसिक रूप से कष्टदायी था, बल्कि इसने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी भारी क्षति पहुंचाई थी, लेकिन अब इस नई वैक्सीन के आने से पशुओं को बिना वजह मारने की मजबूरी हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगी।
वैश्विक बाजारों में वैक्सीन निर्यात की बड़ी संभावनाएं
अफ्रीकन स्वाइन फीवर वर्तमान में केवल भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई विकसित और विकासशील देशों के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती और सिरदर्द बना हुआ है। ऐसे में भारत में पूर्ण रूप से विकसित यह सस्ती, अत्यधिक सुरक्षित और उच्च गुणवत्ता वाली वैक्सीन वैश्विक स्तर पर इन देशों के लिए संजीवनी साबित होगी। भारत सरकार अब इस स्वदेशी टीके को प्रभावित देशों में बड़े पैमाने पर निर्यात करने की योजना बना रही है, जिससे न केवल अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की वैज्ञानिक साख और मजबूत होगी, बल्कि देश के लिए बड़े पैमाने पर विदेशी मुद्रा अर्जित करने के नए मार्ग भी प्रशस्त होंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव से मिले सीजी पॉवर के एमडी कौल
टैलेंट सर्च में एथलेटिक्स का दमदार आगाज़: 400 से अधिक खिलाड़ियों ने दिखाई रफ्तार और हुनर
आयुष्मान भारत योजना में मध्यप्रदेश को राष्ट्रीय सम्मान
'यजमान' टिप्पणी से मचे बवाल के बाद कांग्रेस विधायक ने मांगी माफी, सियासत गरमाई
लोकमान्य तिलक पुरस्कार से सम्मानित होंगे अजीत डोभाल, 1 अगस्त को आयोजित होगा समारोह