छतरपुर। मध्यप्रदेश के छतरपुर जिले से मानवता को शर्मसार कर देने वाली एक बेहद खौफनाक वारदात सामने आई है। यहाँ कथित तौर पर महिलाओं के एक समूह ने ५५ वर्षीय एक महिला को लाठियों से पीट-पीटकर मौत के घाट उतार दिया। इस बर्बरता का एक रोंगटे खड़े कर देने वाला वीडियो भी सोशल मीडिया पर प्रसारित हुआ है, जिसमें हमलावर महिला पर लगातार वार करते हुए दिखाई दे रहे हैं और बेबस महिला जमीन पर पड़ी तड़प रही है। घटना के बाद पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, जिससे स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश व्याप्त है।

बारिश के पानी की निकासी और पुरानी रंजिश बनी हमले की वजह

यह हिंसक वारदात बीती ११ जुलाई की बताई जा रही है, जिसके बाद गंभीर रूप से घायल हुई पीड़िता हरकुंवर प्रजापति ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। मृतका के परिजनों के अनुसार, हरकुंवर अपने घर के बाहर जमा हुए बारिश के पानी की निकासी के लिए बाहर निकली थीं। इसी दौरान पुरानी रंजिश को लेकर घात लगाए बैठे विरोधी परिवार के लोगों ने उन पर लाठियों और डंडों से अचानक हमला बोल दिया। इस हमले में उन्हें सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में बेहद गंभीर चोटें आईं, जो अंततः उनकी मौत का कारण बनीं।

घटनास्थल पर मौजूद पुलिस की मूकदर्शक भूमिका पर उठे गंभीर सवाल

पीड़िता के बेटे राजेंद्र प्रजापति ने स्थानीय पुलिस की भूमिका पर बेहद गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं। राजेंद्र का दावा है कि जब यह खूनी संघर्ष और हमला हो रहा था, तब आपातकालीन पुलिस सेवा 'डायल-११२' की टीम मौके पर ही तैनात थी। इसके बावजूद पुलिसकर्मियों ने बीच-बचाव करने या हमलावरों को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया और मूकदर्शक बने रहे। परिजनों के अनुसार, इस पूरे खूनी विवाद की मुख्य वजह मृतका के छोटे बेटे और आरोपी परिवार की एक लड़की का पूर्व में साथ चले जाना था, जिसे लेकर दोनों परिवारों में लंबे समय से तनाव चल रहा था।

अस्पताल के बजाय थाने ले जाने की लापरवाही का आरोप

मृतका के बेटे राजेंद्र ने पुलिस प्रशासन पर संवेदनहीनता का एक और बड़ा आरोप मढ़ते हुए कहा कि गंभीर रूप से घायल उनकी मां को तुरंत अस्पताल पहुंचाकर इलाज दिलाने की सख्त जरूरत थी। परंतु, पुलिसकर्मी तड़पती हुई महिला को सीधे अस्पताल ले जाने के बजाय कागजी कार्रवाई के लिए थाने ले गए, जिससे उन्हें समय पर उचित इलाज नहीं मिल सका। जब उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, तब तक काफी देर हो चुकी थी और डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने अब तक मुख्य नामजद चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।

दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की चेतावनी

इस पूरे मामले में पुलिस की ढुलमुल कार्यशैली और लापरवाही के आरोपों पर जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) रजत सकलेचा ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। उन्होंने मीडिया को आश्वस्त करते हुए कहा कि मामले की पूरी गंभीरता से आंतरिक जांच कराई जा रही है। एसपी ने स्पष्ट किया कि यदि जांच में मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों की लापरवाही या निष्क्रियता सिद्ध होती है, तो उनके खिलाफ बेहद सख्त विभागीय और अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। फिलहाल पुलिस स्थिति को नियंत्रण में बनाए रखने और शेष फरार आरोपियों की धरपकड़ के लिए लगातार दबिश दे रही है।