कालोनाईजर को फायदा पहुॅचान का लगा रहे आरोप
बालाघाट। सड़क एवं पुल विकास की अहम कड़ी हैं, इससे ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहर के विकास का रास्ता भी खुलता हैं। पुल-पुलिया बनने से सबसे ज्यादा लाभ ग्रामीण क्षेत्र की जनता को होता हैं। अगर वहीं पुल विवादों में पड़ जाये, तो फिर शासन को भी पुल बनाने में परेशानियों का सामना करना पड़ता हैं। वर्षो से क्षतिग्रस्त पुल को ठीक करने की पहले जहमत नहीं उठाई जनप्रतिनिधियों ने कुछ ऐसा ही मामला वारासिवनी नगर व ग्राम पंचायत वारा के शिवधाम मोहगे के बीच से होकर गुजरने वाली बड़ी नहर पर पुल बनाने को लेकर सामने आया हैं। विदित हो कि वारासिवनी नगर के वार्ड नं। 3-4 व ग्राम पंचायत वारा के शिवधाम मोहगे को जोडऩे वाला वर्षो पुराना पुल क्षतिग्रस्त हो गया हैं। जिसे ठीक करवाने या नया पुल बनवाने की मॉग शिवधाम मोहल्ले में रहने वाले नागरिकगण वर्षो से जनप्रतिनिधियों से करते रहे हैं। लेकिन जनप्रतिनिधियों के कानों पर कोई जूॅ नहीं रेंगी।
लेकिन जब वारासिवनी-वारा के बीच सड़क मार्ग पर रेल्वे क्रासिंग पर ओवर ब्रिज स्वीकृत हो गया और ब्रिज निर्माण के दौरान वारासिवनी से बालाघाट जाने-आने वाले वाहनों के लिए वैकल्पिक मार्ग बनाने की तैयारियॉ प्रारंभ हो गई। तो आनन-फानन में जनप्रतिनिधि द्वारा एक पुल लगभग 28 लाख 56 हजार रूपये की लागत से स्वीकृत करवा लिया गया।
रेल्वे विभाग बना चुका हैं नहर पर आवागमन के लिए नया पुल
इस बीच ओवर ब्रिज का निर्माण करने वाली कंपनी ने आवागमन के वैकल्पिक साधन के रुप में बालाघाट मार्ग पर स्थित गणेश मंदिर के बाजू से सड़क मार्ग बनाकर बड़ी नहर पर नये पुल का निर्माण नागरिकों व वाहनों के आवागमन के लिए कर दिया। इस नवीन पुल व शिवधाम मोहल्ले के पुराने पुल के बीच लगभग 40-50 फीट की ही दूरी हैं। इस नये पुल के बनने से शिवधाम मोहल्ले में रहने वाले नागरिकों को इस नये पुल से वारासिवनी की ओर आने जाने की सुविधा हासिल हो गई।
नया पुल बनने से 100 मीटर के अंदर हो जायेगे नहर पर 3-3 पुल
लेकिन इसी बीच जनप्रतिनिधि द्वाराा स्वीकृत करवाए गए पुल के निर्माण का कार्य भी बड़ी नहर पर प्रारंभ करने की कवायद शुरु हो गई। जिसके लिए एजेंसी द्वारा लेआऊट भी दे दिया गया। बड़ी नहर पर नवीन पुल के लेआऊट को देखने के बाद शिवधाम मोहल्ला वासियों में आक्रोश की लहर दौड़ गई। क्योंकि ओवर ब्रिज निर्माण करने वाले ठेकेदार द्वारा बनाए गए पुल और पुराने पुल से इस बनने वाले नये पुल की दूरी 100 मीटर से भी कम हैं। जिस कारण शिवधाम मोहल्लेवासियों व वार्ड नं। 4 वारासिवनी के नागरिकों ने इस पुल निर्माण कार्य का विरोध प्रारंभ कर दिया और इस पुल को बड़ी नहर के बालाघाट छोर पर वारा में बनाने की मॉग की। जिससे शिवधाम मोहल्ले के दूसरे छोर के नागरिकों को उस पुल से ग्राम वारा में स्थित पंचायत भवन, मध्यप्रदेश विद्युत मंडल कार्यालय, सी एम राईस टिहलीबाई स्कूल और बालाघाट जाने के लिए आसानी हो सके।
काम चालू करने आई जेसीबी मशीन को वॉर्डवासियों ने कराया वापस
सोमवार 27 मई को जब बड़ी नहर पर पुल निर्माण का कार्य प्रारम्भ करने के लिए जेसीबी मशीन स्थल पर पहुॅची। तो शिवधाम मोहगे व वॉर्ड नंबर 4 के रहवासियों ने विरोध प्रारंभ कर दिया। जिसके कारण जेसीबी चालक को मशीन को लेकर वापस जाना पड़ा। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि 100 मीटर की दूरी पर 3-3 पुल का कोई औचित्य नहीं हैं। वास्तव में यह पुल अवैध रुप से प्लाटिंग कर कालोनी बनाने वाले कॉलोनाईजरों को फायदा पहुॅचाने के उद्देश्य से बनाया जा रहा हैं। जबकि इस स्थान पर पुल को बनाने का कोई मतलब नहीं हैं। उन्होंने पुल को बालाघाट की ओर आगे की ओर बनाने की मॉग की हैं।
कालोनाइजर को फायदा पहुँचाने उस स्थान पर जबरदस्ती किया जा रहा पुल निर्माण-अशोक नंदनवार
शिवधाम मोहगे के निवासी अशोक नंदनवार ने बताया कि जिस स्थान पर पुल निर्माण होने वाला हैं, उस स्थान के कुछ ही दूरी पर पहले से दो पुल बने हुए हैं। जिससे इस स्थान पर नए पुल निर्माण करवाने का कोई औचितय नहीं हैं। बल्कि वहॉ से कुछ दूरी पर नए पुल का निर्माण किया जाये, तो उससे सीधा बालाघाट मार्ग पर रास्ता निकलेगा। लेकिन जहॉ पर अभी पुल बनाने की कोशिश की जा रही हैं, उससे कालोनाईजरों को अधिक फायदा होगा।
जनता के मांग पर किया जाये नए पुल का निर्माण-राजा अली
ग्राम पंचायत वारा के पूर्व सरपंच राजा अली ने कहा कि कई वर्षो से पुराना पुल बना हुआ हैं। जो अभी बहुत 'यादा क्षतिग्रस्त हो चुका हैं। नया पुल बनवाने की बहुत आवश्यकता हैं, चूॅकि पुराने पुल से कुछ ही दूरी पर रेल्वे ने डायवर्सन के लिए नया पुल बना चुका हैं। इसलिए अब यहां दूसरा नया पुल नहीं बनना चाहिए। अगर नए पुल का निर्माण वारा की ओर से किया जाता हैं, तो शिवधाम मोहगे के हजारों रहवासियो को इसका लाभ मिलेगा और बालाघाट मार्ग में जाने सीधे रास्ता मिल जायेगा और लोगों को आने जाने में परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।