बालाघाट। पीएम आवास से बने मकानों की हुई ब्रिकी
बालाघाट। इन दिनों कटंगी शहर में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत बने आवासों का भौतिक सत्यापन हो रहा है। इस दौरान बड़ी संख्या में ऐसे हितग्राही मिले है। जिन्हें 2018-19 में आवासी स्वीकृत होने के बाद भी तीसरी किस्त यानी 50 हजार की राशि नहीं मिली है। वहीं जांच दल ने भौतिक सत्यापन में यह भी पाया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने मकानों की ब्रिकी हो गई है। जिस हितग्राही को आवास योजना का लाभ मिला था। उस हितग्राही ने आवास को बेच दिया है। अब वहां खरीददार निवास कर रहा है। जैसा कि एक दिन पहले यह वार्ड क्रमांक 02 में यह पाया गया था कि वार्ड क्रमांक 02 में दो ऐसे हितग्राही मिले थे। जिनका डीपीआर में नाम नहीं है। अब पता चला है कि उनमें एक हितग्राही गुलाबचंद राहंगडाले का नाम वार्ड क्रमांक 01 के डीपीआर में है। वैसे तो प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी के मकानों को किराये पर देना और नगरपालिका की अनुमति के बिना इन्हें बेचना प्रतिबंधित है। संशोधित गाइडलाइन में इसके स्पष्ट निर्देश हैं। बावजूद इसके कटंगी में पीएम आवास के हितग्राही ने मकान बेच दिया और इसकी भनक तक नगर परिषद को नहीं लगी।
वार्ड क्रमांक 05 में जिन मकानों को बेचे जाने की जानकारी मिली हमने उन सभी मकानों को देखा। दो मकान खाली मिले जिनमें दो मकान बेचे जाने की पुरी तरह से पुष्टि हुई। इन तीनों ही मकानों में कहीं भी हितग्राही नहीं मिले। रेणुका देवाहे नाम की हितग्राही को जो आवास स्वीकृत हुए उसे रावि ताजिर द्वारा खरीदे जाने की जानकारी सामने आई। जब रावि ताजिर से दूरभाष पर चर्चा की गई तो वह मुकर गए। मगर, आस-पड़ोस के लोगों ने बताया कि उन्होंने ही आवास खरीदा है। वहीं रेणुका के पति ने बताया कि भाई से विवाद होने के कारण मकान में ताला लगा रखा है। वहीं ललिता नाम की एक हितग्राही का मकान किसी महिला ने खरीद लिया है। इस मकान में अब 2 हजार रुपए देकर कोई किराएदार रहने के लिए आ गए है। इसी प्रकार एक मकान को भी बेच दिया गया। हालांकि जब हम वहां पहूंचे तो मकान में ताला लगा हुआ था।
गरीब लोगों का एक ही सपना होता है कि उनके पास सिर ढकने के लिए अपनी छत हो, इसके लिए वो लगातार दिन-रात मेहनत भी करते हैं। फिर भी पक्की छत नहीं बना पाते। ऐसे में केंद्र सरकार ने पीएम आवास योजना शुरू की थी। इस स्कीम का जमकर दुरुपयोग किया गया है। बता दें कि प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी का लाभ देने में नगर परिषद कटंगी की ओर से घोर लापरवाही बरती गई है। जिनके पास पहले से ही पक्के मकान थे। ऐसे लोगों को भी नगर परिषद ने हितग्राही बनाकर योजना का लाभ दिया है। एक ही परिसर में एक परिवार में पिता-पुत्र और भाईयों को आवास योजना का लाभ पहुंचाया गया है। तर्क दिया गया है कि राशन कार्ड और समग्र आईडी अलग-अलग होने के कारण लाभ पहुंचाया गया। जबकि वास्तविकता तो यही है कि दोनों एक ही परिसर में और एक ही घर में निवास कर रहे है। वार्ड क्रमांक 14 में पिता-पुत्र को पीएम आवास योजना का लाभ दिया गया है। पिता के नाम का आवास तो बन गया पुत्र के नाम के आवास का पता नहीं है। यह तमाम विसंगतियां जांच दल के सामने आ रही है। बहरहाल, नगर में पीएम आवास योजना में जो गड़बड़ी हुई है उसमें ना सिर्फ अधिकारी और कर्मचारी दोषी दिखाई पड़ते है बल्कि पीएम आवासों को जिया टैग करने वाली कंपनी ईजीआईएस भी इसमें बराबर की दोषी हो सकती है। इस कंपनी के जिन कर्मचारियों ने जिया टैग किया है। उनसे भी पूछने की जरूरत है कि आखिर एक ही दिन में नॉन स्टारटेंट, फाउंडेशन, लिंटिन और रूफ का काम कैसे पूर्ण हो गया। यह अपने आप में एक गजब कारनामा है। जिसे जियो टैग करने वाली कंपनी ने अंजाम दिया है।