बालाघाट। कटंगी शहर के वार्ड क्रमांक 10 में प्लाटिंग काटने भू-माफियाओं ने तोड़ा सरकारी प्रसाधन
बालाघाट। कृषि भूमि पर बिना डायवर्सन के अवैध तरीके से प्लाटिंग कर कई लाखों-करोड़ों रुपए कमाकर सरकार को कई लाखों रुपयों का राजस्व का चूना लगाने वाले भू-माफियाओं के खिलाफ शासन और प्रशासन स्तर पर कार्रवाई के आदेश तो कई बार जारी होते है। मगर, कभी कोई कठोर कार्रवाई नहीं होती। जिस कारण भू-माफियाओं के हौसले बेहद बुलंद होते जा रहे है और भू-माफिया प्रशासनिक अधिकारियों, सरकारी नियम-कायदे, कानूनों को ठेंगा दिखाकर अपनी मनमानी कर रहे है। ताजा मामला कटंगी शहर के वार्ड क्रमांक 10 मुंंदीवाड़ा का है। यहां कथित तौर पर भू-माफियाओं के एक सिंडिकेट ने कृषि भूमि पर बिना डायवर्सन ही प्लाटिंग काटनी शुरू कर दी है। हालांकि अभी प्लाटों ब्रिकी शुरू नहीं हो पाई है। स्थानीय रहवासियों ने बताया कि प्लाटिंग में आने-जाने का रास्ता बनाने के लिए भू-माफियाओं ने सरकारी भूमि पर नगर परिषद के द्वारा बनाया गया प्रसाधन (पेशाबघर) तोड़ दिया है। जिसकी जानकारी नगर परिषद तक पहुंचने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। भू-माफियाओं के द्वारा अपने स्वार्थों के लिए सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना कोई नई बात तो नहीं है। वहीं प्रशासनिक अधिकारियों से कोई कार्रवाई की उम्मीद करना भी अब बेमानी लगती है। हल्का पटवारी ओमप्रकाश राहंगडाले ने बताया कि मुंदीवाड़ा में जिस जगह प्लाटिंग होने की जानकारी मिली है। उस भूमि का अब तक डायवर्सन नहीं हुआ है और ना ही वहां के प्लाट बेचे गए है। स्थानीय रहवासियों के मुताबिक जिस स्थान पर प्लाटिंग हो रही है। वहां पर गोवारी समाज परंपरागत तरीके से खिलिया मुठिया देव की पूजा भी करते रहा है। यहीं वजह रही कि जब गोवारी समाज के जिलाध्यक्ष महेश सहारे को खिलिया मुठिया को क्षतिग्रस्त किए जाने की जानकारी मिली थी तो वह मौके पर पहुंचे और समाज के अन्य लोगों को वस्तुस्थिति की जानकारी ली।
स्थानीय रहवासियों ने बताया कि जिस जगह पर प्लाट बेचने के लिए प्लाटिंग की गई है। वहां केवल रविवार के दिन ही काम होता है। दरअसल, रविवार के दिन सरकारी अवकाश होता है और भू-माफियाओं को इस बात की जानकारी है कि अगर कोई शिकायत करता भी है तो रविवार को कोई भी अधिकारी अपने घर से बाहर नहीं निकलता। इस कारण कृषि भूमि का समतलीकरण से लेकर प्लाटों को चिन्हित करने की पूरी प्रक्रिया केवल रविवार को ही पूरी होती है। वैसे तो प्रशासन अवैध प्लाटिंग पर सख्ती दिखाने की बात जरूर करता है किंतु जमीन पर इसका पालन होता हुआ नजर नहीं आता। जैसा कि बीते दिनों बालाघाट कलेक्टर डॉ गिरीश कुमार मिश्रा ने बालाघाट, वारासिवनी और बैहर के एसडीएम को अवैध कालोनी के निर्माण के संबंध में जांच प्रतिवेदन मांगें थे। जिसके बाद कटंगी एसडीएम ने भी इस तरह के मामलों को संज्ञान में लेते हुए कटंगी में पटवारियों के साथ बैठक की थी।
शासन-प्रशासन के सारे नियमों को ताक पर रखकर खेत-खलिहान में अवैध प्लॉट की खरीदी-बिक्री हो रही है। हालात यह है कि शहर के आसपास इलाकों में रोज कहीं ना कहीं अवैध कॉलोनी का नक्शा खींचा जा रहा है। सरकार ने कुछ साल पहले अवैध प्लाटिंग पर कड़ाई से रोक लगाने को लेकर एक आदेश जारी किया था। जिसमें लेआउट स्वीकृत कराए बगैर जमीन पर प्लाटिंग नहीं हो पाने की बात थी। इस आदेश का कितनी कड़ाई से पालन हो रहा है। इस बात का अंदाजा लगाना बहुत मुश्किल काम नहीं है। कटंगी में तो बिना ले आउट स्वीकृत कराए ही प्लाटिंग हो रही है। सरकार के आदेश के अनुसार टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से लेआउट अप्रूवल की कापी के आधार पर ही जमीन की रजिस्ट्री होनी थी। लेकिन शहर और शहर के आस-पास निर्मित अधिकांश प्लाटिंग बिना किसी लेआउट स्वीकृत कराए ही हो रही है। शहर में 15 से ज्यादा अवैध कालोनियां हैं जहां बगैर ले आउट पास कराए टुकड़ों में जमीन बेची गई है और आज भी बेची जा रही है। ऐसी कालोनियों में न तो सड़क बनाई जाती है, न ही पानी, बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं मिल पाती हैं। अवैध कालोनी बनाने वाले ईडब्ल्यूएस के लिए भूखंड भी नहीं छोड़ते हैं। हालांकि नगर परिषद कटंगी ने शहर की कई पुरानी अवैध कालोनियों में राजनीतिक दबाव के चलते सुविधाएं मुहैया करवाई है।