बालाघाट। बालाघाट कलेक्टर डॉ गिरीश कुमार मिश्रा के निर्देश पर इन दिनों नगर परिषद कटंगी द्वारा शहरी क्षेत्र में आवंटित किए गए प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के आवासों की जांच चल रही है. जांच के लिए 18 सदस्यों का एक दल गठित किया गया. इस दल के सदस्य नगर परिषद के वार्ड प्रभारियों के साथ आवासों का भौतिक सत्यापन कर रहे है। बुधवार को जांच दल के दो सदस्य जब वार्ड क्रमांक 02 में आवासों का सत्यापन करने के लिए पहुंचे तो वह भी भौचक्के रह गए। जांच दल ने पाया कि पीएम आवास में पशुचारा रखकर पीएम आवास को पशुशाला बना दिया गया है। वहीं इस वार्ड में दो ऐसे भी हितग्राही मिले। जिनका डीपीआर में नाम तक नहीं है बावजूद उन्हें आवास योजना का लाभ भी मिला और पूर्ण किस्त यानी 2।50 की राशि भी प्रदान कर दी गई। इसी वार्ड में जिनके पास पहले से पक्का मकान है। उन्हें भी योजना का लाभ पहुंचाया गया। जबकि इसी वार्ड में गरीब हितग्राहियों को 05 साल का लंबा वक्त बीतने के बाद भी तीसरी किस्त नहीं मिली। वार्ड क्रमांक 02 में टामलाल नाम के हितग्राही ने पीएम आवास के नाम पर एक कमरा बनाया है जिसमें पशु चारा रखा हुआ पाया गया। जबकि इसी वार्ड में हितग्राही नंदकिशोर भगत के पक्के मकान के बाजू में पीएम आवास बना है जिसमें बकरियां बांधी जाती है। गुलाबचंद राहंगडाले और डोलचंद भगत का नाम ही डीपीआर में मौजूद नहीं है बावजूद इन्हें संपूर्ण किस्त प्रदान कर दी गई है।
     गौरतलब हो कि कलेक्टर डॉ गिरीश कुमार मिश्रा ने जांच दल को हितग्राहियों की पात्रता की जांच करने, आवासों की स्थिति, स्वीकृत डीपीआर में नाम है या नहीं, स्वीकृत वर्ष, स्वीकृत आवास के दस्तावेज की उपलब्धता, कार्य पूर्ण होने पर जियो टैग किया गया या नहीं, जियो टैग करने में कितना विलंब किया गया और जियो टैग के पश्चात भुगतान में कितना विलंब किया गया। इन बिंदुओं के आधार पर जांच करने के लिए आदेशित किया है। मगर, जांच दल के सदस्य अभी केवल भौतिक सत्यापन कर रहे है यानी यह देख रहे है कि आवास निर्माण हुआ या नहीं और अगर हो गया है तो किस्त मिली या नहीं। जांच दल शेष बिंदुओं पर अभी जांच नहीं कर रहा है। जांच दल के सदस्यों ने बताया कि हितग्राहियों की पासबुक में एंट्री नहीं है। जिस कारण यह मिलान करना मुश्किल हो रहा है कि जियो टैग करने के कितने दिनों बाद किस्त आवंटित की गई। जांच दल आवास के दस्तावेज की उपलब्धता के बारे में भी ठीक तरीके से जानकारी एकत्रित नहीं कर पा रहा है। हितग्राहियों से जांच दल के सदस्य जब दस्तावेज मांग रहे है तो हितग्राहियों के पास कोई दस्तावेज ही नहीं है। जिसके बाद जांच दल नगर परिषद से आवास से जुड़े दस्तावेज मांगेगा।
      उल्लेखनीय है कि कई अपात्रों को भी योजना का लाभ दिया गया है लेकिन जांच दल इसकी जांच नहीं कर पा रहा है। जैसा कि शहर में कई अपात्रों को हितग्राही बनाया गया है। जिनके पास आलीशान पक्के मकान है। उन्हें भी आवास योजना का लाभ दिया गया है। जांच दल जरूर इस बात की जांच कर रहा है कि आवास योजना का लाभ मिला है या नहीं लेकिन इस बात का जांच में उल्लेख नहीं हो पा रहा है कि पूर्व में पक्का आवास होने के बाद भी पीएम आवास योजना का लाभ दिया गया है। जिस कारण इस बात की पुष्टि फिलहाल तो होते नहीं दिख रही है कि अपात्र लोगों को लाभ दिया गया है। बहरहाल, जांच में एक बात तो खुलकर सामने आ रही है कि वर्ष 2018-19 में जिन हितग्राहियों प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिया गया है। उनमें कई हितग्राहियों को 05 साल का वक्त बीतने के बाद भी तीसरी किस्त नहीं मिल पाई है। नगर परिषद कटंगी नोड़ल अधिकारी उपयंत्री राजेश चौकसे, लिपिक अशोक दुबे हितग्राहियों को लगातार गुमराह करते रहे कि सरकार से राशि नहीं मिल पाई है। बता दें कि एक तरह तो पीएम आवास में किन हितग्राहियों को तीसरी किस्त मिल पाई है या नहीं। आवास का निर्माण हुआ या नहीं इसकी जांच कलेक्टर के निर्देश पर जारी है। वहीं 17 मई को पीएम आवास योजना के हितग्राही दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और तीसरी किस्त मय ब्याज के साथ दिलाने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपने और नगर परिषद कटंगी कार्यालय का घेराव करने की तैयारी में है।