बालाघाट। दो महीने की कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार वन विकास निगम के अधिकारियों ने बाघ के शिकारियों को पकडऩे में सफलता हासिल कर ली हैं। जानकारी अनुसार बाघ के शिकार के बाद से लगातार शिकारियों की तलाश में लगे हुए वन विभाग के अधिकारियों ने ग्राम बोदलकसा, तुमड़ीटोला, सावंगी सहित अन्य ग्रामों के अनेंक लोगों से पूछताछ की थी। लेकिन बाघ के शिकारियों का कोई पता नहीं चल पा रहा था।
गोपनीय तरीके से खोजबीन करने पर मिला सुराग
जिसके बाद कुछ समय की सुस्ती दिखाते हुए गोपनीय तरीके से वन विभाग के अमले ने ग्रामीण क्षेत्रों की चाय, पान की दुकानों में बैठकर टोह लेने का कार्य प्रारंभ किया और आखिरकार इस कार्य में उन्हें सफलता मिल ही गई और ग्राम बोदलकसा के लगभग 7 ग्रामीणों को इस मामले में वन विभाग के अधिकारियों ने अपनी गिरफ्त में ले लिया हैं। इन सभी आरोपियों को कल 17 मई को न्यायालय में पेश किया जायेगा।
17 मार्च को तुमडीटोला के चंदन नदी में मिला था बाघ का शव
विदित हो कि 17 मार्च 24 को ग्राम पंचायत सावंगी के ग्राम तुमड़ीटोला के पास से होकर बहने वाली चंदन नदी में एक बाघ का शव मिलने से सनसनी फैल गई थी। इस बाघ की मौत के बारे में वन विभाग का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी कुछ भी बोलने से उस समय कतरा रहा था।
2 से ढ़ाई वर्ष उम्र, लगभग 100 से 120 किलो वजन
मृत बाघ को देखने में ऐसा प्रतीत होता था कि लगभग एक सप्ताह पहले बाघ की मौत हुई होगी और किसी शिकारी द्वारा करेंट लगाकर बाघ का शिकार कर उसके अवशेष को निकाल कर नदी में फेंक दिया गया था। अधिकारियों ने घटनास्थल पर पहुॅच कर डॉग स्काड को बुलाया था। लेकिन उसका कोई परिणाम नहीं निकला था। जिसके बाद बाघ के शव का पंचनामा बनाया गया और उसका पोस्टमार्टम करवा कर उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस मृत बाघ का वजन लगभग 100 से 120 किलो रहा होगा, उसकी उम्र लगभग 2 से ढाई वर्ष था।
जबलपुर से भी आए थे अधिकारी जॉच के लिए बाघ का शव मिलने के बाद आरोपियों की तलाश के लिए वन विभाग व जबलपुर से आए हुए उच्चाधिकारियों द्वारा लगातार प्रयास किए गए और ग्राम बोदलकसा, तुमड़ीटोला, सावंगी, खापा, खंडवा के कई ग्रामीणों से पूछताछ की गई थी। लेकिन बाघ के शिकारियों का कोई पता वन विभाग के अधिकारी नहीं लगा पाए थे। लगातार प्रयासों के बाद भी नहीं मिले थे आरोपी, गोपनीय तरीका अपनाया वन विभाग ने लगातार प्रयासों के बाद भी जब बाघ के शिकारी नहीं मिले, तो फिर वन विभाग ने दूसरा तरीका अपनाया और गोपनीय तरीके से आरोपियों की तलाश जारी की और इन ग्रामों की चाय व पान दुकानों में बैठकर इधर-उधर की चर्चा कर कभी सूअर का मॉस, तो कभी चीतल का मॉस कौन बेचता हैं, हमने तो फलाने से लिया था, अब वह नहीं बेचता क्या? जैसी चर्चाओं के माध्यम से आखिरकार इस बात का पता लगा लिया कि इन कार्यो में कौन-कौन ग्रामीण लिप्त रहते हैं।
इस बात का पता चलते ही वन विभाग के अधिकारियों ने सबसे पहले ग्राम बोदलकसा के 2 ग्रामीणों पर अपना शिकंजा कसा और उनको पकड़ कर उनसे कड़ी पूछताछ की, तो आखिरकार उन्होंने बाघ के शिकार के बाद उसे ठिकाने लगाने में सहयोग करने का भांडा फोड़ ही दिया। उसके साथ ही उन्होंने मुख्य आरोपी का नाम भी बता दिया। जिसके बाद वन विभाग के अधिकारियों ने मुख्य आरोपी और उसके अन्य साथियों को गिरफ्तार कर उनसे पूछताछ की। तो आखिरकार उन्होंने अपना अपराध कबूल कर लिया। फिलहाल वन विभाग इन आरोपियों को कल 17 मई को न्यायालय में पेश किया जाने वाला हैं।
इनका कहना हैं
बाघ के शिकार के आरोपियों को कल 17 मई को सुबह 11 बजे न्यायालय में पेश किया जायेगा। पत्रकारों को वहीं पर पूरी जानकारी दी जायेगी।
शिवभान सिंह नागेश्वर परियोजना अधिकारी वन विकास निगम वारासिवनी